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Bihar Viral Video: उफनती नदी कंधे पर बेटे को बैठाकर पार करता पिता, पश्चिम चंपारण का वीडियो भावुक कर देगा

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Alam Ki Khabar: पश्चिम चंपारण के रामनगर के दोन क्षेत्र में एक पिता का वीडियो वायरल है, जिसमें वह उफनती नदी पार कर बेटे को स्कूल पहुंचाते नजर आ रहे हैं। यह तस्वीर इलाके में पुल की कमी और लोगों की परेशानी को भी उजागर करती है।

पश्चिम चंपारण, 16 जुलाई। आलम की खबर: बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के रामनगर प्रखंड के दोन क्षेत्र से सामने आया एक वीडियो लोगों की आंखें नम कर रहा है। वीडियो में ढोकनी दोन गांव निवासी देवराज महतो अपने बेटे शुभम कुमार को कंधे पर बैठाकर तेज बहाव वाली नदी पार करते दिखाई दे रहे हैं, ताकि वह समय पर स्कूल पहुंच सके। बरसात के मौसम में नदी उफान पर होने के बावजूद पिता ने बेटे की पढ़ाई को प्राथमिकता देते हुए अपनी जान जोखिम में डाल दी।

बताया जाता है कि शुभम कुमार बेलाटांडी मॉडल आवासीय विद्यालय का छात्र है। गांव से स्कूल की दूरी करीब सात किलोमीटर है और बीच में बहने वाली नदी पर अब तक पुल का निर्माण नहीं हो सका है। ऐसे में बरसात के दिनों में छात्रों और ग्रामीणों को नदी पार कर ही अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ता है।

वीडियो में नदी का तेज बहाव साफ दिखाई देता है। एक छोटी-सी चूक बड़ा हादसा बन सकती थी, लेकिन बेटे की शिक्षा के प्रति पिता की जिम्मेदारी ने उन्हें पीछे नहीं हटने दिया। यही वजह है कि यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग पिता के साहस की सराहना कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। हर वर्ष मानसून के दौरान दोन क्षेत्र के लगभग 22 गांव चारों ओर से पानी से घिर जाते हैं। सड़क संपर्क टूट जाता है, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है और मरीजों को अस्पताल पहुंचाना भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीण वर्षों से नदी पर पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल सका है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि पुल का निर्माण हो जाए तो हजारों लोगों की परेशानी दूर हो सकती है। बरसात के दिनों में जान जोखिम में डालकर नदी पार करने की मजबूरी भी समाप्त होगी। फिलहाल देवराज महतो का यह वीडियो केवल एक पिता के प्रेम की कहानी नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी की हकीकत भी बयां कर रहा है।

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एक पिता का अपने बेटे के भविष्य के लिए संघर्ष प्रेरणादायक है, लेकिन यह स्थिति सामान्य नहीं होनी चाहिए। यदि बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए उफनती नदी पार करनी पड़े, तो यह बुनियादी ढांचे की कमी की ओर भी इशारा करता है। शिक्षा और सुरक्षित आवागमन दोनों सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

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